Wednesday, May 15, 2019

लड़कियों, प्लीज ये पढ़ो. सजग रहो और सुरक्षित रहो



पिछले महीने की बात है. पोलाची केस के बारे में आपने पढ़ा होगा. तमिलनाडु में कोयंबटूर से 45 किलोमीटर दूर पोलाची में एक गैंग सक्रिय था, जो महिलाओं से फेसबुक पर फ्रेंडशिप करता था, उनका भरोसा हासिल करता था, उनसे अंतरंग बातें करता था और फिर उन्हें ब्लैकमेल करता था. उसका शिकार हुए लोगों में जवान लड़कियों से लेकर उम्रदराज औरतें तक शामिल थीं.
11 मार्च को एक वेबसाइट पर एक वीडियो पब्लिश हुआ. ब्लर किए हुए उस वीडियो में एक महिला रोते-चीखते लड़कों से गुजारिश कर रही थी कि मुझे नुकसान मत पहुंचाओ. ये उसी पोलाची गैंग का वीडियो था. ये लोग इस हद तक महिलाओं का भरोसा जीत लेते थे कि वो उनसे निजी तौर पर मिलने को भी तैयार हो जाती थीं, अंतरंगता भी होती, रिश्ते भी बनते. बस वो लड़कियां ये नहीं जानती थीं कि उनका वीडियो बनाया जा रहा है. उनकी निजता, सुरक्षा सब कुछ दांव पर है. जिसे वो दोस्ती, प्यार, कैजुअल सेक्स, जो भी समझ बैठी हैं, वो फरेब की ऐसी खाई है, जिसमें गिरेंगी तो अकेले मरेंगी.
आज एक महीने बाद उस घटना का जिक्र अचानक क्यों मौजूं हो गया? क्योंकि परसों रात मेरे इनबॉक्स में एक मैसेज आया. एक लड़की ने अपनी कहानी सुनाई कि कैसे फेसबुक पर एक लड़के से उसकी दोस्ती हुई. दोस्ती लंबी चैटिंग में और चैटिंग प्यार में बदल गई. अभी तक सब वर्चुअल ही था. लेकिन प्यार था तो संकोच की दीवारें एक-एक कर गिरने लगीं. मोबाइल नंबर शेयर हुए और व्हॉट्सएप पर इंटीमेट बातें हुईं. लड़की ने ठीक-ठीक ये शब्द नहीं कहा, लेकिन बात दरअसल सेक्स चैटिंग की थी. लड़की की निजी फंतासियां, उसके सुख के अरमान, देह की कामनाएं, सब शब्द बनकर वर्चुअल स्पेस में चले गए. दूसरी ओर एक आदमी था, जो सब कुछ जमा कर रहा था, लड़की के सपनों का बहीखाता बना रहा था. जैसे बहुत सी दोस्तियों और मुहब्बत की उम्र बहुत लंबी नहीं होती, इस दोस्ती की भी नहीं रही. लड़का अब किसी और लड़की से ऐसे ही वर्चुअल प्रेम की पींगें बढ़ा रहा था और ये लड़की छटपटा रही थी. जो उसने इस पर रोना-बिफरना चाहा, लड़के को लानतें भेजना तो एक ऐसा विस्फोट हुआ कि प्रेम के दुख की जगह डर ने ले ली. लड़के ने कहा था कि उसकी सारी इंटीमेट चैट और तस्वीरें उसके पास सुरक्षित हैं और कभी भी सार्वजनिक की जा सकती हैं. इसलिए बेहतर होगा कि वो चुपचाप उसकी जिंदगी से चली जाए. लड़की ने दोहरी मार खाई थी. उसका दिल भी टूटा था और भरोसा भी.
पोलाची गैंग के मर्दों ने एक साथ सैकड़ों लड़कियों को निशाना बनाया था. वो अब तक बेधड़क ये करते आ रहे थे. लड़कियां बदनामी के डर से चुप थीं. उनमें से कोई एक साहसी निकली, जिसके परिवार ने भी दोष उसके मत्थे नहीं मढ़ा, उसका साथ दिया तो ये गैंग पकड़ा गया.
लेकिन क्या हम नहीं जानते है कि हमारे आसपास, हमारे घरों, दफ्तरों, बिल्डिंग और कॉलोनी में ऐसे कितने नकाबपोश छिपे हुए हैं? और कितनी ऐसी नासमझ लड़कियां, जो रोज जाने-अनजाने फरेब की खाई में गिर रही हैं.
लड़के भरोसे के लायक क्यों नहीं हैं? उन्हें कैसा होना चाहिए? समाज को कैसा होना चाहिए? फिलहाल ये सब मेरी चिंता का सवाल नहीं.

मेरी चिंता का सवाल हैं वो लड़कियां, जिनके हाथों में इस वक्त डेटा कार्ड वाला स्मार्ट फोन है, दिल में प्यार के सपने हैं, देह में सुख के अरमान और अनुभवों का बक्सा खाली. बात समझने और समझाने वाले परिपक्व दोस्त की जगह खाली. हाथ पकड़ने, राह दिखाने वाले टीचर की जगह खाली. बेटी को भरोसा देने और उस पर भरोसा करने वाले परिवार की जगह खाली.
ऐसे में क्या करेंगी ये लड़कियां? कोई मिलेगा फेसबुक पर, मीठी-मीठी बातें करेगा, वो उसे दोस्त समझ लेंगी? उस पर भरोसा कर लेंगी? आखिर दिल्ली की उस पत्रकार महिला ने भी तो उस मर्द साथी पर भरोसा ही किया था, जिसने उसका सेक्‍स वीडियो बनाकर सारे ऑफिस के लोगों को भेज दिया था. इस शहर दिल्ली में ऐसा कोई पत्रकार नहीं, जिसने वो वीडियो न देखा हो. जस्सी फेम मोना सिंह ने भी तो अपने ब्वॉयफ्रेंड पर भरोसा ही किया था, जिसने उसका न्यूड वीडियो पब्लिक कर दिया था. और डीपीएस की वो लड़की, जो देश भर के पत्रकारों के लिए देश के पहले एमएमएस स्कैंडल की स्टोरी बन गई थी. और छोटे शहरों-कस्‍बों की वो सैकड़ों लड़कियां, जिनके बारे में रोज ऐसी खबरें छपती हैं कि “अश्‍लील वीडियो वायरल होने पर लड़की ने की आत्‍महत्‍या.”
जब मैं कॉलेज में थी तो इलाहाबाद में हमारे मुहल्ले की एक लड़की की उसके ब्वॉयफ्रेंड ने ब्लू फिल्म बनाकर इंटरनेट पर डाल दी थी. उनका परिवार रातोंरात वो मुहल्ला और शहर छोड़कर चला गया. आज भी कई बार मुझे उसका खयाल आता है. वो कहां होगी? और आज भी वो लड़का उसी मुहल्ले में छाती चौड़ी कर घूमता है और सड़क पर खड़े होकर पेशाब करता है. लड़की को फिर किसी ने कभी नहीं देखा.
और जरूरी नहीं कि तुम्हारी अंतरंग चीजें हर लड़का इंटरनेट पर ही डालता फिरे. कई बार वो ये सब सिर्फ अपने दोस्तों और सहकर्मियों को भी दिखा रहा होता है, अपनी उपलब्धि की तरह.
इसलिए मेरी चिंता ये नहीं कि लड़कों का क्या? मेरी चिंता है कि लड़कियों का क्या? कुछ बातें हैं, जो कम उम्र की नौजवान लड़कियों से कहना चाहती हूं. शायद तुम इन बातों पर गौर करना चाहो -:
1. अजनबियों से बात करने में कोई बुराई नहीं है. आज जो तुम्हारा अच्छा दोस्त है, वो भी कभी अजनबी रहा होगा. ऐसे ही मिलते हैं अजनबी जिंदगी में और फिर अपने हो जाते हैं. लेकिन वर्चुअल स्पेस के अजनबियों से थोड़ा सावधान. जो सीधे इनबॉक्स में फ्रेंडशिप वाला गुलाब भेज दे, सीधे नंबर मांग ले या बात की शुरुआत ही यूं करे कि “आपकी आंखें बड़ी खूबसूरत हैं” तो यकीन मानो या तो वो महाजाहिल है या महामक्कार. और दोनों ही किस्म के लोग दोस्ती के लायक नहीं.
2. कुछ ऐसे भी होते हैं, जो गरिमा से बात करते हैं, आदर से पेश आते हैं. जो अच्छे भी लग सकते हैं और जिनसे प्यार भी हो सकता है. और जब कोई अच्छा लगने लगे तो उसकी हर बेजा मांग के सामने भी लड़कियां सिर झुका देती हैं. लेकिन याद रखो, जिसने किसी भी किस्म की गलत मांग की, वो इंसान भरोसे के लायक नहीं. सेक्स चैट की या न्यूड फोटो मांगी, उस पर भरोसा मत करना.
3. कुछ चीजें ऐसी हैं, जो कभी भी, किसी के भी साथ, किसी भी हाल में नहीं करनी चाहिए. जैसे अपनी न्यूड तस्वीरें भेजना या सेक्स चैट करना. अगर वो लड़का इतना करीबी है कि पूरा परिवार भी उसे जानता है, तुम्हें लगता है कि उससे कभी कोई खतरा नहीं हो सकता, तो भी नहीं. किसी से भी नहीं. उससे भी नहीं, जिससे शादी तय हुई हो या शादी हो चुकी हो. किसी से, किसी हाल में नहीं.
4. इंसान अगर भरोसे वाला हो तो भी वर्चुअल स्पेस भरोसे वाला नहीं है. यहां कोई चीज डिलिट नहीं होती और न कुछ भी पर्सनल होता है. तुम्हारी पर्सनल मेल से लेकर व्हॉट्सएप तक सब कुछ एक्सेस किया जा सकता है. फर्ज करो, तुम्हारा फोन या लैपटॉप खराब ही हो जाए. तो उसे ठीक करने वाले के हाथ वो सारी निजी चीजें लग सकती हैं. इंटरनेट की अंधेरी दुनिया में कौन, कहां, कब, क्या डाल दे, कर दे, कोई भरोसा नहीं. इसलिए ऐसी कोई वलनरेबल चीज न फोन पर रखनी चाहिए और न ही कभी किसी को भेजनी चाहिए.
5. स्काइप, फेसटाइम, व्हॉट्सएप या किसी भी तरह के वीडियो चैट पर कोई न्यूडिटी नहीं. लाख डिमांड पर भी नहीं. वो स्पेस भी उतना ही खतरनाक है.
6. याद रखो, ये जितनी भी बातें हैं, जो तुमसे सचमुच प्यार करता है, जो सचमुच तुम्हारा दोस्त है, वो इन सावधानियों के प्रति पहले से हजार गुना सावधान होगा. जो प्यार करेगा, वो कभी नहीं करेगा ऐसी कोई बेजा मांग.
7. और सबसे आखिर में सबसे जरूरी बात. आखिर हम फिसलते ही क्यों हैं? हम क्यों फंसते हैं इस जाल में? बात सिर्फ इतनी नहीं है कि अनुभव कम है, भरोसा कर बैठे. उस उम्र में हम भरोसा इस कदर करते हैं और ऐसे कि मानो भरोसा करने के लिए ही बैठे थे. इसमें गलती नहीं है तुम्हारी. उस उम्र का, उस इच्छा का आवेग ही कुछ ऐसा होता है. जितने बल से मां की देह चीरकर बच्चा आता है संसार में, वैसे ही बल से आती हैं देह की कामनाएं, जब उम्र आती है. ये दुर्घटनाएं बार-बार इतने रूपों में, इतने बड़े पैमाने पर और इतनी सारी लड़कियों के साथ इसीलिए होती हैं कि कामना के उस बल के आगे, देह और मन की उस बेचैनी के आगे बुद्धि, विवेक, दुनियादारी का डर सब हथियार डाल देते हैं.
इसलिए अगर हम देह और मन की उस बेचैनी को उससे थोड़ा परे हटकर देख पाएं, समझ पाएं, किसी से बात कर पाएं तो सुख के साथ सुख के खतरे को भी समझेंगे, सुख की जिम्मेदारी को भी समझेंगे, सुख की गरिमा को भी समझेंगे.
हम सही चुनेंगे, हम ईमानदार चुनेंगे.


- मनीषा पाण्डेय

Sunday, April 14, 2019

बिब्लियोथेक नेशनल, पेरिस



बिब्लियोथेक नेशनल, पेरिस
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मैं यहां बैठा हूं और एक कवि* को पढ़ रहा हूं।

यहां बहुत सारे लोग हैं, लेकिन मुझे तो जैसे किसी की ख़बर ही नहीं। वे भी अपनी किताबों में खोए हैं। कभी-कभी वे किताबों के पन्ने यों उलटते, जैसे नींद में डूबा कोई व्यक्ति दो स्वप्नों के बीच करवट बदलता हो।

आह, किताब पढ़ रहे लोगों के बीच होना कितना सुंदर है! वे हमेशा ऐसे क्यों नहीं होते? आप चाहें तो उनके पास जाकर उन्हें हल्के-से छू भी सकते हैं और उन्हें पता भी ना चलेगा। और अगर आप अपनी कुर्सी से उठते समय समीप बैठे किसी व्यक्ति से टकरा गए, और आपने इसके लिए माफ़ी मांगी, तो वो आपकी तरफ़ देखे बिना केवल उस दिशा में सिर भर हिला देगा, जहां से क्षमायाचना की आवाज़ आई थी। और उसके बाल वैसे मालूम होंगे, जैसे कोई अभी-अभी नींद से उठा हो। ये सब कितना अच्छा है!
और मैं यहां बैठा हूं और एक कवि को पढ़ रहा हूं। कैसा सौभाग्य! अभी यहां कोई तीन सौ लोग होंगे, और सभी कुछ ना कुछ पढ़ रहे हैं, लेकिन सभी किसी कवि को थोड़ ना पढ़ रहे होंगे। दुनिया में तीन सौ कवि ही कहां हैं? ईश्वर ही जानता है, कि वे इतने मन से किस चीज़ में डूबे हैं। किंतु मेरे सौभाग्य पर विचार कीजिए कि मैं, जो शायद इन सभी लोगों में सबसे दयनीय हूं, और दूसरे देश से आया हूं, यहां बैठा हूं और एक कवि को पढ़ रहा हूं। तो क्या हुआ, अगर मैं निर्धन हूं और मेरा सूट इतना अच्छा नहीं, अलबत्ता मेरी कमीज़ की कॉलर ज़रूर साफ़ है। लेकिन अभी मैं इन किताबों के साथ हूं, सभी से इतना दूर, जैसे कि मैं मर चुका हूं। और मैं एक कवि को पढ़ रहा हूं!
आपको पता भी है, कवि क्या होता है? वर्लेन का नाम सुना है? शायद आपके लिए उसका नाम कोई मायने नहीं रखता होगा। लेकिन मैं वर्लेन को नहीं पढ़ रहा हूं। मैं किसी और कवि को पढ़ रहा हूं, जो पेरिस में नहीं रहता। जिसका घर पहाड़ों पर है और जिसकी आवाज़ साफ़ हवा में बजती घंटियों सरीखी है। जिसको कि कहते हैं- "ख़ुशख़त!" वैसा ही एक कवि, जो घर की खिड़कियों और किताबघर के शीशों के बारे में बतलाता है। जो एकान्त से भरी दूरियों पर गहराई से सोचता है। मैं उस जैसी ही कविताएं लिखना चाहता हूं, लेकिन अभी तो मेरे सिर पर छत भी नहीं है और मेरी काठ की मेज़ें खलिहानों में रखी सड़ रही हैं।
कभी-कभी मैं र्यू-दे-सीन की छोटी दुकानों में चला जाता हूं। वो होती हैं ना क़ीमती गुलदानों या पुरानी किताबों की दुकानें। पूरा-पूरा दिन इन दुकानों में कोई झाँकने तक नहीं आता, लेकिन उनमें देखने पर आप पाते हैं कि दुकान-मालिक को जैसे इसकी परवाह ही नहीं, वे चुपचाप बैठे पढ़ते रहते और उनके पैरों के नीचे उनका कुत्ता सुस्ताता रहता। तब कभी-कभी मैं यह भी सोचता हूं कि भरे बाज़ार में वैसी एक दुकान ख़रीद लूं और उसकी शीशे की दीवारों के पीछे बीस साल तक चुपचाप, अकेला बैठा रहूं!
~ रिल्के
[ "द नोटबुक्स ऑफ़ माल्ते लॉरिड्ज़ ब्रिग्गे" ]

Friday, March 1, 2019

हृदयाघात


पड़ोस में एक सज्जन को तीन घण्टे पहले सीने में दर्द उठा। कुछ घबराहट भी थी। धर्मपत्नी संग ही थीं। 325 मिग्रा की एस्पिरिन और सॉर्बिट्रेट एक गिलास पानी के साथ ले आयीं। सज्जन को दवाएँ खिला दी गयीं। तब तक लोग उन्हें मेडिकल कॉलेज लेकर भागे। वहाँ जाकर मायोकार्डियल इन्फार्क्शन की पुष्टि हुई।
जिस दर से समाज में हृदयरोग बढ़ रहे हैं , उसके अनुसार चबायी जाने वाली एस्पिरिन और सॉर्बिट्रेट का घर में रखा जाना कोई अतिवादी क़दम नहीं। अब हम इस धोखे में नहीं जी सकते कि हृदयाघात पैंसठ साल के आदमी को होगा या केवल डायबिटीज़ के रोगी को अपना शिकार बनाएगा। जब पच्चीस-तीस साल के लड़के सीने में दर्द के कारण भर्ती हो रहे हैं और उनमें हृदयाघात की पुष्टि हो रही है , तो ऐसे में लापरवाही उचित नहीं होगी।

एस्पिरिन का चबाया जाने वाला यह स्वरूप अगर सीने में दर्द के तुरन्त बाद दे दिया जाए , तो हृदय की मांसपेशियों की क्षति को कम कर देता है। ध्यान रहे कि यह एस्पिरिन वह एंटेरिक कोटेड एस्पिरिन नहीं है , जिसे डॉक्टर हृदयाघात की रोकथाम के लिए लिखते हैं। वह गोली चबायी नहीं जाती , निगली जाती है। यहाँ गोली को चबाना है ताकि वह ख़ून में जल्दी पहुँचे और काम शुरू कर दे। जब सीने में दर्द उठ ही चुका है , तो रोकथाम का प्रश्न नहीं उठता। तब पहले प्राथमिक उपचार के बाद सीधे ऐसे अस्पताल भागना है , जहाँ हृदयरोग-विशेषज्ञ मौजूद हैं।

सज्जन के परिवार वाले समझदार हैं। उनकी पत्नी की जितनी प्रशंसा की जाए , कम होगी। वे स्वयं डायबिटीज़ से ग्रस्त हैं। लेकिन घर में उनकी डायबिटीज़ की दवाओं के अलावा एक ग्लूकोमीटर , एक ग्लूकोज़ का डिब्बा , चबायी जाने वाले एस्पिरिन , सॉर्बिट्रेट , एसिडिटी-नाशक गोलियाँ और ब्लड-प्रेशर-यन्त्र हमेशा उपलब्ध रहते हैं। ये लोग कभी इन संसाधनों के बिना कहीं यात्रा नहीं करते। मुसीबत स्थान देखकर नहीं आती। वह कहीं भी बिना चेताये प्रकट हो सकती है।

चबायी जाने वाली एस्पिरिन किन्हें न दी जाए --- यह सवाल महत्त्वपूर्ण है। अधिकांश लोग इन गोलियों को सीने में उठे दर्द के लिए खा सकते हैं। हृदयाघात की आशंका-भर इसके सेवन के लिए काफ़ी है। कारण कि इस दवा से होने वाले लाभ की तुलना में हानि नगण्य है। हाँ , लेकिन अगर रोगी के पेट में अल्सर हो , अथवा ख़ून पतला करने की कोई दवाएँ चल रही हों या फिर एस्पिरिन के प्रति हायपरसेंसिटिविटी के लक्षण रहे हों , तब ऐसे लोगों को ये गोलियाँ नहीं खानी चाहिए।

ज़ाहिर हैं , इस तरह के अपवाद समाज में कम ही हैं। और ऐसे में चबायी जाने वाली एस्पिरिन सीने में उठे दर्द के लिए प्राथमिक उपचार बनकर उभरती है।

क्या आपके घर में चबायी जाने वाली एस्पिरिन 325 मिग्रा है ? सॉर्बिट्रेट ? अगर नहीं हैं , तो निकटतम मेडिकल-स्टोर घर से कितनी दूर है ? निकटतम अस्पताल जहाँ हृदयरोग के लिए कैथलैब उपलब्ध हो , वह कितनी दूर है ? क्या आपने कभी इन सब सवालों पर ग़ौर किया है ?

इस विषय में अपने डॉक्टर से अवश्य चर्चा कीजिए। यह वह प्राथमिक क़दम है , जो हम-सब हृदय-रोगों के विरुद्ध उठा सकते हैं।


- डॉ.स्कंद शुक्ल

Sunday, February 24, 2019

जलियाँवाला बाग में बसंत


यहाँ कोकिला नहीं, काग हैं, शोर मचाते, 

काले काले कीट, भ्रमर का भ्रम उपजाते।

कलियाँ भी अधखिली, मिली हैं कंटक-कुल से,
वे पौधे, व पुष्प शुष्क हैं अथवा झुलसे।

परिमल-हीन पराग दाग सा बना पड़ा है,
हा! यह प्यारा बाग खून से सना पड़ा है।

ओ, प्रिय ऋतुराज! किन्तु धीरे से आना,
यह है शोक-स्थान यहाँ मत शोर मचाना।

वायु चले, पर मंद चाल से उसे चलाना,
दुःख की आहें संग उड़ा कर मत ले जाना।

कोकिल गावें, किन्तु राग रोने का गावें,
भ्रमर करें गुंजार कष्ट की कथा सुनावें।

लाना संग में पुष्प, न हों वे अधिक सजीले,
तो सुगंध भी मंद, ओस से कुछ कुछ गीले।

किन्तु न तुम उपहार भाव आ कर दिखलाना,
स्मृति में पूजा हेतु यहाँ थोड़े बिखराना।

कोमल बालक मरे यहाँ गोली खा कर,
कलियाँ उनके लिये गिराना थोड़ी ला कर।

आशाओं से भरे हृदय भी छिन्न हुए हैं,
अपने प्रिय परिवार देश से भिन्न हुए हैं।

कुछ कलियाँ अधखिली यहाँ इसलिए चढ़ाना,
कर के उनकी याद अश्रु के ओस बहाना।

तड़प तड़प कर वृद्ध मरे हैं गोली खा कर,
शुष्क पुष्प कुछ वहाँ गिरा देना तुम जा कर।

यह सब करना, किन्तु यहाँ मत शोर मचाना,
यह है शोक-स्थान बहुत धीरे से आना।

- सुभद्रा कुमारी चौहान

Pulwama terror attack 2019 

Wednesday, January 2, 2019

Kafka and the Doll : The pervasiveness of Loss



" Everything that you love, you will eventually lose, but in the end, love will return in a different form."

Franz Kafka, encountered a little girl in the park where he went walking daily. She was crying. She had lost her doll and was desolate

Kafka offered to help her to look for the doll and arranged to meet her the next day at the same spot.Unable to find the doll, he composed a letter from the doll and read it to her when they met.

'Please do not mourn me, I have gone on a trip to see the world. I will write you of my adventures.' This was the beginning of many letters. When he and the little girl met he read her from these carefully composed letters, the imagined adventures of the beloved doll. The little girl was comforted.

When the meetings came to an end, Kafka presented her with a doll. She obviously looked different from the original doll. An attached letter explained " My travels have changed me.."

Many years later, the now grown girl found a letter stuffed into an unnoticed crevice in the cherished replacement doll. In the summary it said:"Everything that you love, you will eventually lose, but in the end, love will return in a different form.

Saturday, November 3, 2018

रश्मिरथी




वैसे तो पूरी की पूरी रश्मिरथी ही बेहद रोमांचक और सम्मोहित कर लेने वाली है। लेकिन इस खण्डकाव्य का तीसरा सर्ग मुझे व्यक्तिगत तौर पर बहुत ही पसन्द है। और इसमें भी "कृष्ण की चेतावनी " वाला हिस्सा बेहद रोमांचित करता है। इस हिस्से में जहां एक ओर पांडवों की सामान्य चाहत और निर्लोभी प्रवृत्ति दिखाई देती है वहीं कौरवों का लोभ और विलासिता में आसक्त होना।
इसमें श्रीकृष्ण के विनम्र और रौद्र दोनों रूप एक साथ देखने को मिलता है। और रश्मिरथी के अनुसार महाभारत के रण की नींव इसी दृश्य में रखी गयी।

वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम,
सह धूप-घाम, पानी-पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर।
सौभाग्य न सब दिन सोता है, देखें, आगे क्या होता है।

मैत्री की राह बताने को, सबको सुमार्ग पर लाने को,
दुर्योधन को समझाने को, भीषण विध्वंस बचाने को,
भगवान् हस्तिनापुर आये, पांडव का संदेशा लाये।

दो न्याय अगर तो आधा दो, पर, इसमें भी यदि बाधा हो,
तो दे दो केवल पाँच ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम।
हम वहीं खुशी से खायेंगे, परिजन पर असि न उठायेंगे!

दुर्योधन वह भी दे ना सका, आशीष समाज की ले न सका,
उलटे हरि को बाँधने चला, जो था असाध्य साधने चला।
जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है।

हरि ने भीषण हुंकार किया, अपना स्वरूप-विस्तार किया,
डगमग-डगमग दिग्गज डोले, भगवान कुपित होकर बोले
जंजीर बढ़ा कर साध मुझे, हाँ, हाँ दुर्योधन! बाँध मुझे।

यह देख, गगन मुझमें लय है, यह देख, पवन मुझमें लय है,
मुझमें विलीन झंकार सकल, मुझमें लय है संसार सकल।
अमरत्व फूलता है मुझमें, संहार झूलता है मुझमें।

उदयाचल मेरा दीप्त भाल, भूमंडल वक्षस्थल विशाल,
भुज परिधि-बन्ध को घेरे हैं, मैनाक-मेरु पग मेरे हैं।
दिपते जो ग्रह नक्षत्र निकर, सब हैं मेरे मुख के अन्दर।

दृग हों तो दृश्य अकाण्ड देख, मुझमें सारा ब्रह्माण्ड देख,
चर-अचर जीव, जग क्षर-अक्षर, नश्वर मनुष्य, सुरजाति अमर।
शत कोटि सूर्य, शत कोटि चन्द्र, शत कोटि सरित, सर, सिन्धु मन्द्र।

शत कोटि विष्णु, ब्रह्मा, महेश, शत कोटि जिष्णु, जलपति, धनेश,
शत कोटि रुद्र, शत कोटि काल, शत कोटि दण्डधर लोकपाल।
जञ्जीर बढ़ाकर साध इन्हें, हाँ-हाँ दुर्योधन! बाँध इन्हें।

भूलोक अटल पाताल देख, गत और अनागत काल देख
यह देख जगत का आदि सृजन, यह देख महाभारत का रण
मृतकों से पटी हुई भू है पहचान, कहाँ इसमें तू है

अंबर में कुंतल जाल देख, पद के नीचे पाताल देख
मुट्ठी में तीनो काल देख, मेरा स्वरूप विकराल देख
सब जन्म मुझी से पाते हैं फिर लौट मुझी में आते हैं

जिह्वा से कढ़ती ज्वाला सघन, साँसों से पाता जन्म पवन
पड़ जाती मेरी दृष्टि जिधर, हँसने लगती है सृष्टि उधर
मैं जभी मूँदता हूँ लोचन छा जाता चारो ओर मरण

बाँधने मुझे तो आया है, जंजीर बड़ी क्या लाया है
यदि मुझे बाँधना चाहे मन, पहले तो बाँध अनन्त गगन।
सूने को साध न सकता है, वह मुझे बाँध कब सकता है

यदि मुझे बाँधना चाहे मन, पहले तो बाँध अनन्त गगन।
हित-वचन नहीं तूने माना, मैत्री का मूल्य न पहचाना,
तो ले, मैं भी अब जाता हूँ, अन्तिम संकल्प सुनाता हूँ।

याचना नहीं, अब रण होगा, जीवन-जय या कि मरण होगा।
टकरायेंगे नक्षत्र-निकर, बरसेगी भू पर वह्नि प्रखर,
फण शेषनाग का डोलेगा, विकराल काल मुँह खोलेगा।

दुर्योधन! रण ऐसा होगा। फिर कभी नहीं जैसा होगा।
भाई पर भाई टूटेंगे, विष-बाण बँद से छूटेंगे,
वायस-श्रृगाल सुख लूटेंगे, सौभाग्य मनुज के फूटेंगे।

आखिर तू भूशायी होगा, हिंसा का पर, दायी होगा।
थी सभा सन्न, सब लोग डरे, चुप थे या थे बेहोश पड़े।
केवल दो नर न अघाते थे, धृतराष्ट्र-विदुर सुख पाते थे।

कर जोड़ खड़े प्रमुदित, निर्भय, दोनों पुकारते थे 'जय-जय '


Wednesday, March 28, 2018

Disgusting !!






RIGHT NOW SOMEWHERE AROUND YOU THIS IS ACTUALLY HAPPENING
Please read till the end...

You are chatting at night with her

You suddenly feel horny
You quickly ask for a nude
She says no
You continue
She asks you to understand her
You tell her to trust you
She says she can't expose her body to anyone
You still go on.

She tells you to wait
You wait patiently
She sends it
You feel happy
You wank on it
You finish, you look at the nude again
You feel disgusted
You think its nasty after wanking on it
You then go to mobile uploads
You upload the pic with a nasty caption
You even tag her
She sees it
She sends you a message for you to delete it, she cries and begs
But you say no‼
She tells you she'll send more if you delete that one
You say you've seen everything you wanted.

People start to like and react on the nude

Some start to comment bad things, some defend, some feel sorry, some laugh.
Her friends see the nude, some friends are disappointed and discriminate her, some friends defend her, but it does nothing cause everybody has seen the nude.

Some people share it
Some save and some even show her relatives
She's toned she regrets she cries
Next day she goes to school
She finds some people booing her
She enters the class just about to sit, she's called by the head teacher
She's told to explain what the head teacher and the member of stuff have heard, she fails
She's beaten.

The head teacher call her parents
They talk to the head teacher and the result is that she's expelled ‼
The parents try to plead but the head teacher is cold hearted
She goes home 
Her parents are disappointed, and they also beat her.

Her phone is taken away
Her life ruined
She tries to take a walk just to think things through
But as she's walking people point at her
She hears them talking about the same thing
Some laugh
She goes back home.

Thinking too much
She decides to commit suicide as a relief
She goes to her mothers bedroom
She gets the rat poison
She quickly drinks it
Within two minutes she's dead.

Her parents call for her
She doesn't answer
They are mad they call again, she doesn't answer
They quickly go to her bedroom to beat her
They find her dead with the rat poison beside her
They feel bad, they blame themselves
They cry, they regret punishing her
They call her relatives and close friends
Everybody knows and they feel sad
Her best friend cries cause she can't believe what she sees.

The exposer also hears the news
He is toned
He regrets, he feels like going back to time
The burial day has come,  her best friend and parents see the coffin lowering
they all burst in tears
They can't believe it.

Her parents are never the same from their daughters
Everybody close to her are not the same
The exposer is being haunted with force pictures of her.
It started simple until it was too much
You can easily ruin someone's life with something you think is simple.
Life is like electricity, Anybody can shock you.
Be careful who you hurt...

(Copied content)